Jan 18, 2019

अष्टलक्ष्मि स्तोत्रम



आचमनः

ॐ अच्युताया नमः  / स्वाहा !
ॐ अनन्ताय नमः  /  स्वाहा !
ॐ गोविन्दाय नमः  / स्वाहा !

गणपति ध्यानं 


शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्नाम चतुर्भुजं
प्रसन्नवदनं ध्यायेत सर्वा विघ्नोपशंताये !  

ॐ ह्रीं अष्ट महालक्ष्म्यै नमः॥

आदिलक्ष्मि
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते । 

पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते 

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 1 ॥



धान्यलक्ष्मि
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये
क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।

मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते 

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 2 ॥



धैर्यलक्ष्मि
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते । 

भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते 

जय जयहे मधु सूधन कामिनि, धैर्यलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 3 ॥



गजलक्ष्मि
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये 

रधगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते । 

हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम् ॥ 4 ॥


सन्तानलक्ष्मि
अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये
गुणगणवारधि लोकहितैषिणि, सप्तस्वर भूषित गाननुते ।

सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते 

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 5 ॥



विजयलक्ष्मि
जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये
अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते । 

कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्करदेशिक मान्यपदे 

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 6 ॥



विद्यालक्ष्मि
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये
मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे ।

नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते 

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम् ॥ 7 ॥



धनलक्ष्मि
धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमि, दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम, शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।

वेद पूराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते 

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम् ॥ 8 ॥



फलशृति
श्लो॥ 

अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । 

विष्णुवक्षः स्थला रूढे भक्त मोक्ष प्रदायिनि ॥

श्लो॥ 

शङ्ख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः ।

जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलं शुभ मङ्गलम् ॥



कमला  महाविद्या

एकाक्षरी  मंत्र  - श्रीं ||

द्वाक्षरी मंत्र स्ह्क्ल्रीं हं || 

त्रैक्षरी मंत्र  - श्रीं क्लीं श्रीं  || 

नमः कमलवासिन्यै  स्वाहा ||  

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