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Dec 20, 2018

निर्वाणषट्कं आत्मषट्कं


निर्वाणषट्कं   आत्मषट्कं

मनोबुध्दयहंकारचित्तानि  नाहं 

न च  श्रोत्रजिह्वे  न च ध्राणनेत्रे  | 

न च व्योमभूमिः  न तेजो न वायुः 

   चिदानंदरूपः  शिवोहम  शिवोहम  || १ || 


न च प्राणसंज्ञो  न  वै  पंचवायुः 

न व सप्तधातुर्न  व पंचकोशः  | 

न वाक्  पाणिपादौ  न चोपस्थपायू 

चिदानंदरूपः  शिवोहम  शिवोहम  || २ || 


न मे  द्वेषरागौ  न मे  लोभमोहौ 

मदो  नैव  मे  नैव  मात्सर्यभावः | 

न धर्मो  न चार्थो  न  कामो न मोक्षः 

चिदानंदरूपः  शिवोहम  शिवोहम  || ३  || 


न पुण्यं  न पापं  न सौख्यं   न दुःखं 

न मंत्रो न तीर्थं  न  वेदा  न  यज्ञाः  | 

अहं  भोजनं  नैव  भोज्यं  न भोक्ता 

चिदानंदरूपः  शिवोहम  शिवोहम  || ४  || 


न मे  मृत्युशंका  न मे  जातिभेदः 

पिता नैव  मे  नैव  माता  न जन्म  | 

न बंधुर्न  मित्रं  गुरुर्नैव  शिष्यः 

चिदानंदरूपः  शिवोहम  शिवोहम  || ५ || 


अहं  निर्विकल्पो  निराकाररूपो 

विभुर्व्याप्य  सर्वत्र  सर्वेन्द्रियाणाम  | 

सदा  मे  समत्वं  न  मुक्तिर्न  बन्धः 

चिदानंदरूपः  शिवोहम  शिवोहम  || ६  || 

इति  श्रीशंङ्कराचार्यविरचितं  आत्मषट्कं  सम्पूर्णम  ||